श्री कटासराज मंदिर परिसर (Sri Katasraj Dham Temple Complex) : पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट द्वारा श्री कटासराज मंदिर परिसर (Sri Katasraj Dham Temple Complex) के जीर्णोद्धार और संरक्षण में रुचि लेने के बाद यह मंदिर परिसर पाकिस्तान के सबसे पुराने हिंदू धार्मिक स्थलों में से एक फिर से चर्चा में है।

पंजाब के कल्लर कहार के पास – भगवान राम, हनुमान और शिव को समर्पित मंदिरों का यह शानदार मंदिर परिसर एक प्राकृतिक तालाब के चारों ओर स्थित है। हिंदू धर्म में माना जाता है कि इस तालाब का निर्माण रोते हुए शिव के आंसू से हुआ था जब वह अपनी पत्नी सती के शव को लेकर आकाश में उड़ रहे थे। शिव के एक आंसू यहाँ गिरा था, इससे इस तालाब का निर्माण हुआ था। और दूसरा आंसू राजस्थान के अजमेर में गिरा था जिससे वहाँ भी तालाब बना।

Katas Raj temple complex is a sad monument to Pakistan

पौराणिक कथा के अनुसार, पांडव अपने निर्वासन के दौरान इस स्थान पर आए थे और उन्होंने कुछ पुराने मंदिरों का निर्माण किया था। ऐतिहासिक अभिलेखों से पता चलता है कि कश्मीरी स्थापत्य परंपरा में निर्मित कई मंदिर 11वीं शताब्दी में बनाए गए थे। उस समय यह क्षेत्र, पंजाब के कुछ हिस्सों के साथ, एक कश्मीरी राज्य के अधीन था।

श्री कटासराज मंदिर परिसर सिर्फ एक खंडहर हिंदू स्थल नहीं है। तालाब से थोड़ी दूरी पर एक गुरुद्वारे के अवशेष हैं, जिसके बारे में माना जाता है कि गुरु नानक दुनिया भर में अपनी यात्रा के दौरान यहाँ आए थे। इस परिसर के राम मंदिर से सटे हरि सिंह नलवा की हवेली के अवशेष हैं, जो कि महाराजा रणजीत सिंह की सेना में सबसे प्रसिद्ध सेनापति थे। हवेली के पीछे एक बौद्ध स्तूप के आंशिक रूप से खुदाई के अवशेष हैं, मूल रूप से एक मंदिर परिसर जिसे सम्राट अशोक के शासनकाल के दौरान उपमहाद्वीप बौद्ध धर्म के अधीन आने पर विनियोजित किया गया था।

माना जाता है कि 11वीं शताब्दी में प्रसिद्ध मुस्लिम विद्वान अल-बिरूनी जिन्होंने पश्चिम में हिंदू धर्म का परिचय दिया था, उन्होंने हिंदू धर्म का अध्ययन करते हुए यहां समय बिताया था।

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पाकिस्तान के अस्तित्व के बाद यह मंदिर परिसर धीरे-धीरे खंडहर में खोता जा रहा है। 2005 में, पूर्व भारतीय उप प्रधान मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने मंदिर का दौरा किया, जिसके बाद पाकिस्तान सरकार ने मंदिर का जीर्णोद्धार किया। तब से, यह मंदिर भारत-पाकिस्तान संबंधों का बैरोमीटर रहा है।

2000 के दशक के मध्य में जब परवेज मुशर्रफ के शासन ने दिल्ली के साथ संबंधों सुधारने की कोशिश में थे, तो उस समय श्री कटास राज मंदिर परिसर की अच्छी तरह से देखभाल की गई और भारतीय तीर्थयात्रियों को शिवरात्रि उत्सव के लिए आने के लिए प्रोत्साहित किया गया। 2008 के मुंबई हमलों के मद्देनजर भारत-पाकिस्तान संबंध बिगड़ने के कारण तीर्थयात्रियों का आवागमन कम हो गया। फिर, 2017 की शुरुआत में, तत्कालीन प्रधान मंत्री नवाज शरीफ ने कटास राज का दौरा किया और इसके जीर्णोद्धार का आदेश दिया। जिसकी वजह से यह मंदिर फिर से सार्वजनिक चर्चा में आ गया।

कटास राज का इतिहास कई मायनों में अपनी हिंदू विरासत के प्रति पाकिस्तान के उदासीन रवैये को दर्शाता है। विभाजन के बाद, पाकिस्तान में प्राचीन बौद्ध स्थलों को देश के समृद्ध इतिहास के हिस्से के रूप में संरक्षित और प्रचारित किया गया था, जबकि हिंदू विरासत को विभाजन के आघात के रूप में नजरअंदाज कर दिया गया था। भारत के साथ 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान पाकिस्तान में, हिंदू और सिख समुदायों के लोगों पर हमले किए गए थे। 1992 में, भारत में अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद, पाकिस्तान में भी कई हिंदू मंदिरों को नष्ट कर दिया गया था।

21वीं सदी में पाकिस्तान के एक सैन्य तानाशाह के साथ प्रबुद्ध संयम की राष्ट्रीय विचारधारा को आकार देने की कोशिश के साथ यह स्थिति बदलने लगी। 9/11 के बाद जैसे ही दुनिया की निगाह मुस्लिम कट्टरवाद पर टिकी, मुशर्रफ देश की नरम छवि को बढ़ावा देने के लिए उत्सुक थे। 2005 में श्री कटास राज मंदिर परिसर का पहला बड़े पैमाने पर जीर्णोद्धार इसी संदर्भ में हुआ।

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यह एक अच्छा बदलाव था क्योंकि दशकों की चुप्पी के बाद, देश की हिंदू विरासत सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन गई। इस्लामाबाद में, सैदपुर के मॉडल गांव का जीर्णोद्धार किया गया और इसके हिंदू मंदिर और सिख गुरुद्वारे का जीर्णोद्धार किया गया। पर्यटकों के आने से गाँव में कई रेस्तरां खुल गए। मंदिर के अंदर का भाग चित्रित किया गया और इसकी संरचना को मजबूत किया गया था, लेकिन एक मूर्ति स्पष्ट रूप से गायब थी। मंदिर की मूर्ति को संग्रहालय में रखा गया था ताकि पाकिस्तान की राष्ट्रीय पहचान की अवधारणाओं को चुनौती न दी जा सके। एक मूर्ति रखने से मंदिर जीवित हो जाता, जिससे पाकिस्तान की विशेष मुस्लिम नागरिकता की धारणा को खतरा होता।

हिंदू मंदिरों के जीर्णोद्धार के बारे में बात करने में भी पाकिस्तान की आवाम को 50 साल से अधिक का समय लग गया। हाल ही में, पवित्र तालाब के सूखने के बारे में पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश मियां साकिब निसार ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई की और पाकिस्तान के पंजाब सरकार के अधिकारियों से पूछा कि मंदिर परिसर में कोई मूर्ति क्यों नहीं रखी गई? इस पर अधिकारियों ने जवाब दिया कि – तीर्थयात्री अपनी खुद की मूर्ति लगाना चाहते हैं।

यह याद दिलाता है कि मंदिरों के मालिक होने के बावजूद, पाकिस्तान अपनी हिंदू विरासत को अपनी पहचान से अलग करना जारी रखे है। अधिकारियों के लिए, लाखों लोगों के लिए पवित्र श्री कटास राज मंदिर परिसर पूजा करने का स्थान नहीं था, बल्कि केवल ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व का स्मारक था। इस प्रकार इसके नवीनीकरण में इस प्रक्रिया से बौद्धिक दूरी शामिल थी, जो हिंदू विरासत को पाकिस्तानी विरासत में विनियोजित करने के लिए आवश्यक थी। इसलिए कटास राज मंदिरों के संरक्षण में सुप्रीम कोर्ट की दिलचस्पी सही दिशा में एक कदम है।

पिछले एक दशक में, पाकिस्तानी राज्य ने ऐतिहासिक हिंदू मंदिरों के जीर्णोद्धार और संरक्षण के बारे में बात करना स्वीकार्य पाया है। लेकिन क्या यह उन्हें पूजा स्थल भी बनने देने के लिए तैयार है? इस सवाल का जवाब तो शायद समय चक्र ही दे सकता है, लेकिन अभी इसकी की संभावना नही दिख रही।

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