कृष्ण जन्माष्टमी 2020: भगवान कृष्ण के जन्म की कहानी - krishna janmashtami 2020

कृष्ण जन्माष्टमी 2020 : कृष्ण का जन्म मथुरा के यादव वंश में रानी देवकी और उनके पति वासुदेव से हुआ था
Krishna Janmashtami 2020 : जन्माष्टमी, जिसे कृष्ण जन्माष्टमी या गोकुलाष्टमी के रूप में भी जाना जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी भारत में एक प्रमुख हिंदू त्योहार है, इसमें भगवान कृष्ण के जन्म का जश्न मनाया जाता है। कृष्ण को भगवान विष्णु का आठवा अवतार माना जाता है।

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Krishna Janmashtami 2020


हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद माह की अष्टमी के दिन को कृष्णा जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष 24 अगस्त (शनिवार) कृष्णा जन्माष्टमी मनाई जाएगी।

ऐसा माना जाता है कि कृष्ण का जन्म उत्तर प्रदेश के मथुरा के एक कालकोठरी में मध्यरात्रि में हुआ था। कृष्ण प्रेम, कोमलता और करुणा के देवता हैं।

भगवान कृष्ण के जीवन की कथा और कहानियों को कृष्ण लीला कहा जाता है। कथा के अनुसार, कृष्ण का जन्म मथुरा के यादव वंश में रानी देवकी और उनके पति, राजा वासुदेव के घर हुआ था।

देवकी का भाई, कंस एक अत्याचारी था। जो कुछ अन्य दानव राजाओं के साथ धरती माता को आतंकित कर रहा था। कंस ने अपने पिता, परोपकारी राजा उग्रसेन से मथुरा का सिंहासन छीन लिया था।

धरती माता ने गाय का रूप धारण किया और अपनी दुर्दशा बताने भगवान ब्रह्मा के पास गईं। भगवान ब्रह्मा ने फिर भगवान विष्णु को बुलाया, जिन्होंने धरती माता को आश्वासन दिया कि वह इस अत्याचार को समाप्त करने के लिए भगवान कृष्ण के रूप में जन्म लेंगे।

कंस, देवकी की शादी यादव वंश के राजकुमार वासुदेव से इस उम्मीद में करवाया था की यादव वंश पर उसका अधिकार हो जाएगा। लेकिन जब देवकी की शादी हो रही थी, तो कंस को भाग्य बताने वालों ने कहा था कि देवकी की एक संतान उसका मार देगी।

ग़ुस्से में कंस ने अपनी तलवार निकाली और देवकी को वहीं मारने का फैसला किया। लेकिन वासुदेव ने अपनी पत्नी के जीवन के लिए प्रार्थना की और जन्म लेने के बाद प्रत्येक बच्चे को कंस को सौंपने का वादा किया।

इसके बाद कंस ने अपनी बहन को जाने दिया, और देवकी और वासुदेव को कैद कर दिया। कंस ने यह सुनिश्चित किया कि देवकी का कोई भी बच्चा जीवित न रहे। जैसे ही बच्चे का जन्म होता, कंस जेल की दीवारों के पटक कर बच्चे को मार डालता था।

कृष्ण के जन्म की रात, जैसे ही कृष्ण का जन्म हुआ, एक उज्ज्वल प्रकाश जेल में भर गया और वासुदेव एक दिव्य आवाज से जाग गए। जिसने उन्हें निर्देशित किया कि वे कृष्ण को यमुना के पार ले जाएं और उन्हें अपने प्रिय मित्र नंदराज के घर छोड़ दें।

गोप जनजाति के प्रमुख नंदराज और उनकी पत्नी यशोदा ने भी उस रात एक बच्ची को जन्म दिया था। इसलिए वासुदेव ने गुप्त रूप से यमुना नदी के पार शिशु कृष्ण को ले गए।

जब वासुदेव कृष्णा को यमुना पार करा रहे थे तो यमुना नदी शांत अवस्था में नहीं थी, बल्कि इस तरह उग्र थी  जैसे कि वह महासागर हो। तभी भगवान विष्णु के शेषनाग, विशालकाय बहुमुख नागों ने वासुदेव को कृष्ण को नदी के पार सुरक्षित ले जाने में मदद की।

वासुदेव नंदराज के घर गए और बच्चों को बदल दिया। वह बदले हुए बच्चे के साथ वापस जेल आ गए। जिसे वो देवकी के बगल में लिटा दिए। इसके बाद जब जेल के प्रहरी को पता चला तो उसने कंस को सूचित किया कि देवकी का आठवें बच्चे ने जन्म ले लिया है।

कंस आया और बच्चे को मारना चाहा। तब देवकी ने कंस से बच्चे को न मारने की विनती की, उसने निवेदन किया कि भविष्यवाणी गलत हो सकती है, उसका पुत्र कंस का अंत नही करेगा।लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

जब कंस ने उस बच्चे को मारने की कोशिश की, तो वह देवी दुर्गा में परिवर्तित होकर लीन हो गें और एक भविष्यवाणी हुई की "कंस तुम्हारी मृत्यु निकट आ चुकी है, तुम्हारे पापों की सजा देने के लिए वह आएगा"।

हालाँकि, कंस निश्चित था कि भविष्यवाणी सच नहीं हो सकती है, क्योंकि यदि उसका कातिल जेल के अंदर पैदा होता, तो वह निश्चित रूप से उसे मार देता। आठवें संतान को मारने के बाद कंस ने अंततः वासुदेव और देवकी को मुक्त कर दिया और उन्हें एक अलग महल में रहने के लिए भेज दिया।

कुछ दिनों के बाद वासुदेव ने बताया कि कृष्ण के जन्म की रात क्या हुआ था। हालांकि देवकी उदास थी, लेकिन अपने बेटे को सुरक्षित जान कर उन्हें राहत मिली।

कुछ दिनों बाद नंदराज और यशोदा के बेटे के जन्म की खबरें कंस तक पहुँचीं। लोग बच्चे के तेज के बारे में चर्चा कर रहे थे की कैसे उसकी उपस्थिति मात्र से चारों ओर खुशी फैल जाती है। कृष्ण मथुरा के सभी अराजकता से दूर गोकुल में नंद बाबा और उनकी पत्नी यशोदा के यहाँ पल रहे थे। यही थी भगवान श्री कृष्णा के जन्म की कहानी।

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