पवित्र शहर द्वारका के बारे में रोचक तथ्य - Interesting Facts about Dwarka City

पवित्र द्वारका शहर, गुजरात के द्वारका जिले का एक शहर ओखामंडल प्रायद्वीप के पश्चिमी तट पर और गोमती नदी के किनारे स्थित है। द्वारका सबसे महत्वपूर्ण हिंदू तीर्थ स्थलों में से एक है और इसे भगवान कृष्ण के राज्य की प्राचीन और पौराणिक राजधानी कहा जाता है। एक ऐसा प्राचीन शहर जो पुरातत्वविदों के लिए समृद्ध इतिहास, मिथक, मूल्य और एक लोकप्रिय स्थल है। हिंदू सभ्यता के अतीत में, यह आज भी एक बहुत बड़ा महत्व रखता है।

Dwarka, Interesting Facts about Dwarka


आज हम आपको द्वारका के बारे में 10 रोचक जानकारी देंगे - Interesting Facts about Dwarka City

  1. भगवान कृष्ण की पवित्र नगरी (Sacred City of Lord Krishna)
  2. द्वारकाधीश मंदिर (Dwarkadhish Temple)
  3. चार धाम (Char Dham)
  4. रुक्मिणी देवी मंदिर (Rukmini Devi Temple)
  5. सप्त पुरी (Sapta Puri)
  6. गोमती घाट (Gomti Ghat)
  7. बेट द्वारका (Bet Dwarka)
  8. द्वारका में स्कूबा डाइविंग (Scuba Diving in Dwarka)
  9. द्वारका के सात शहर (Seven Cities of Dwarka)
  10. द्वारका का लाइटहाउस (Dwarka's Lighthouse)

1. भगवान कृष्ण की पवित्र नगरी (Sacred City of Lord Krishna)

प्राचीन काल में द्वारका को अनारता (Anarta) के रूप में जाना जाता था, जो भगवान कृष्ण का स्थलीय साम्राज्य था। यह शहर यादव वंश की राजधानी था। यहाँ यादव वंश ने कई वर्षों तक शासन किया। द्वारका में निवास करने वाले यादव वंश के सबसे महत्वपूर्ण राजाओं में भगवान कृष्ण शामिल थे, जो द्वारका के राजा थे।

सबसे लोकप्रिय पौराणिक कथा के अनुसार - "कंस के ससुर, जरासंध द्वारा मथुरा पर बार बार किए जाने वाले हमलों से निवासियों की सुरक्षा के लिए भगवान कृष्ण कुशस्थली में चले गए (प्राचीन काल में द्वारका को इसी नाम से जाना जाता था)। जरासंध कृष्ण के दुष्ट क्रूर मामा कंस की मृत्यु का बदला लेना चाहता था, जिसे भगवान ने मार दिया था। इसी वजह से वह बार बार हारने के बावजूद मथुरा पर आक्रमण करता था, जिससे मथुरा को भी नुकसान उठाना पड़ता था। इसी वजह से भगवान कृष्णा से अपनी राजधानी को मथुरा से रातों रात बदल कर द्वारका कर दी और सभी निवासियों को लेकर द्वारका चले गए।

2. द्वारकाधीश मंदिर (Dwarkadhish Temple)


द्वारकाधीश मंदिर को जगत मंदिर और द्वारकाधीश मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह एक हिंदू मंदिर है, जो भगवान कृष्ण को समर्पित है। द्वारका में भगवान कृष्णा की  द्वारकाधीश या 'द्वारका के राजा' के रूप में पूजा जाता है। द्वारका, भारत के राज्य गुजरात में स्थित है। 72 स्तंभों द्वारा बनी इस 5 मंजिला इमारत के मुख्य मंदिर को जगत मंदिर के रूप में जाना जाता है।

पुरातात्विक निष्कर्ष यह बताते हैं कि यह मंदिर 2000 से 2200 वर्ष पुराना है। मंदिर का विस्तार 15वीं-16 वीं शताब्दी में किया गया था। द्वारकाधीश मंदिर एक पुष्टिमार्ग मंदिर है, इसलिए यह वल्लभाचार्य और विट्ठलनाथ द्वारा बनाए गए दिशानिर्देशों और अनुष्ठानों का पालन करता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मूल मंदिर का निर्माण कृष्ण के पौत्र वज्रनाभ ने हरि-गृह (भगवान कृष्ण के आवासीय स्थान) के रूप में करवाया था।

3. चार धाम (Char Dham)


चार धाम भारत के चार तीर्थ स्थलों के नाम हैं। इसमें बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी और रामेश्वरम शामिल हैं। हिंदुओं द्वारा अपने जीवनकाल में चार धाम की यात्रा को अत्यधिक पवित्र माना जाता है। आदि शंकराचार्य द्वारा निर्मित चार धाम में चार वैष्णव तीर्थ हैं। द्वारका इन महान चार धाम तीर्थ स्थलों में से एक है।

4. रुक्मिणी देवी मंदिर (Rukmini Devi Temple)


रुक्मिणी देवी मंदिर द्वारका से 2 किलोमीटर (1.2 मील) दूर एक मंदिर है। यह मंदिर भगवान कृष्ण की प्रमुख रानी रुक्मिणी देवी को समर्पित है। यह मंदिर 2500 साल पुराना बताया जाता है, लेकिन इसके वर्तमान स्वरूप को लगभग 12वीं शताब्दी में बनवाया गया था। कहा जाता है कि ऋषि दुर्वासा (जो अपने ग़ुस्सैल स्वभाव और शाप देने के लिए प्रसिद्ध थे) को रात्रिभोज के लिए के लिए अपने घर ले जा रहे रथ को भगवान कृष्ण और देवी रुक्मिणी ने खींचा था।

रास्ते में जब रुक्मिणी ने अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी मांगा, तो कृष्ण ने पीने के लिए अपने पैर की अंगुली से जमीन को खोदकर  गंगा जल निकाल दिया। रुक्मिणी ने गंगा जल से अपनी प्यास बुझाई। लेकिन दुर्वासा ने अपमानित महसूस किया क्योंकि रुक्मिणी नें ऋषि दुर्वासा को पानी के लिए नही पूँछा था। इसलिए, उन्होंने देवी रुक्मिणी को श्राप दिया कि वह अपने पति से अलग रहेगी। इसीलिए इन मंदिरों को बारे में कहा जाता है की उसी श्राप के कारण देवी रुक्मिणी और भगवान कृष्ण का मंदिर अलग अलग बना है। जो की पहले उनका निवास स्थान था।

5. सप्त पुरी (Sapta Puri)


सप्त पुरी भारत में सात पवित्र तीर्थस्थलों में से एक हैं। इन तीर्थस्थलों में अयोध्या (राम), मथुरा (कृष्ण), हरिद्वार (विष्णु), वाराणसी (शिव), कांचीपुरम (पार्वती), उज्जैन (शिव) और द्वारका (कृष्ण) शामिल हैं। सप्त पुरी इन्ही स्थानों को कहा जाता है। ये ऐसे स्थान हैं जहाँ भगवान अपने अवतारों में अवतरित हुए हैं। जैसे कि अयोध्या जहाँ भगवान राम का जन्म हुआ था। इसी कारण इन सप्त पुरियों को सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से संपन्न माना जाता है।

6. गोमती घाट (Gomti Ghat)


गोमती नदी द्वारका से होकर बहती है और इसके घाट को ही गोमती घाट के ना से जाना जाता है। गोमती नदी पवित्र गंगा की सहायक नदी है, जो सभी हिंदुओं के लिए सबसे पवित्र नदी है इसलिए इस घाट को एक पवित्र स्थान माना जाता है। यह नदी नेपाल के हिमालय पर्वत से निकलती है और गुजरात के साथ कई भारतीय राज्यों में बहती है।

भगवान कृष्ण की पौराणिक नगरी द्वारका में, गोमती घाट सभी श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसे गोमती संगम घाट भी कहा जाता है। गोमती नदी इसके तुरंत बाद चक्रतीर्थ घाट पर अरब सागर से मिलती है। गोमती घाट तक पहुँचने के लिए द्वारकाधीश मंदिर के स्स्वर्ग द्वार से 56 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। जो द्वारका शहर के केंद्र से 20 मिनट की दूरी पर स्थित है।

कहानियों के अनुसार गोमती नदी, ऋषि वशिष्ठ की पुत्री है और इस नदी में डुबकी लगाने से मनुष्य के पाप धुल जाते हैं। तीर्थयात्री इसे गोमती नदी के गोमती कुंड और समुद्र के संगम पर अपना पवित्र स्नान करते हैं। गोमती कुंड द्वारका के गोमती संगम घाट के बहुत करीब स्थित है।

इसके अलावा, गोमती नदी को अवरोही गंगा माना जाता है। एक नदी जो सीधे स्वर्ग से नीचे उतरती है। यही कारण है कि यह नदी  हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार मनुष्य के हर पाप को धो सकती है। जो इसे एक पवित्र स्थान बनाता है।

7. बेट द्वारका (Bet Dwarka)


इसे शंखधर के नाम से भी जाना जाता है। बेट द्वारका ओखा, गुजरात के तट से 3 किमी की दूरी पर स्थित एक द्वीप है। इस द्वीप को भारतीय महाकाव्य साहित्य 'द्वारका' में प्राचीन शहर के एक हिस्से के रूप में वर्णित किया गया है। जो श्री कृष्ण का निवास स्थान है। इसके बारे में महाभारत और स्कंद पुराण में वर्णन मिलता है। इसे कृष्ण का मूल निवास माना जाता है, द्वारका में ओखा बंदरगाह विकसित होने से पहले, बेट द्वारका द्वीप कृष्ण के प्राचीन काल में पुराना बंदरगाह था।

8. द्वारका में स्कूबा डाइविंग (Scuba Diving in Dwarka)


द्वारका के तट से दूर पानी के भीतर प्राचीन शहर को स्कूबा डाइविंग साइट के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव दिया गया था। यह परियोजना 13 करोड़ रुपए के निवेश के साथ एडवेंचर स्पोर्ट्स लिमिटेड (एएसएल) और गुजरात सरकार की एक संयुक्त पहल है। माना जाता है कि पर्यटन के लिए जलमग्न शहर को विकसित करने का यह दुनिया का पहला प्रयास है। राज्य सरकार द्वारा जल और समुद्र तट के खेल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। हवाई और पनडुब्बी खेलों को भी बढ़ावा देने के प्रस्ताव है।

9. द्वारका के सात शहर (Seven Cities of Dwarka)


कृष्ण अपने नव-निर्मित शहर में जीवन भर थे। भालका तीर्थ में एक जंगल में एक पेड़ के नीचे ध्यान करते हुए एक तीर गलती भगवान कृष्णा को लगा और वो इस मृत्यु लोक से अपने वैकुण्ठ धाम वापस चले गए। उन्होंने जिस शहर की स्थापना की थी, भगवान कृष्ण की मृत्यु के बाद वह बड़े पैमाने पर बाढ़ से जलमग्न हो गया था। इस प्रकार वह शहर समुद्र में समा गया। ऐसा कहा जाता है कि सदियों में कई सभ्यताओं ने अपने शहरों को उस क्षेत्र में बनाया जहां द्वारका शहर था। माना जाता है कि द्वारका का वर्तमान शहर उस जगह पर बनाया गया सातवाँ शहर था।

10. द्वारका का लाइटहाउस (Dwarka's Lighthouse)


द्वारका द्वीप में द्वारका बिंदु पर, एक लाइट हाउस है। जिससे शहर का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है। यह समुद्र तल से 21 मीटर ऊपर स्थित एक लाइट हाउस है। इसका प्रकाश 16 किमी की दूरी पर दिखाई देता है। लाइटहाउस टॉवर की ऊंचाई 12 मीटर है। इस लाइटहाउस टॉवर पर दिया गया रेडियो बीकन एक सौर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल द्वारा संचालित है।

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