अर्जुन के पुत्र ने ही अर्जुन को क्यों मारा था? महाभारत में अर्जुन और पांडवों की मृत्यु कैसे हुई थी? जानिए महाभारत का रहस्य - Arjun Mahabharat

Arjun Mahabharat : जब जब महाभारत की बात की जाती है, तब उसमें सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन का जिक्र करना स्वाभाविक है। लेकिन दोस्तों क्या आपको पता है कि महाभारत में अर्जुन दो बार मरे थे?  जी, हां यह है महाभारत का सबसे बड़ा रहस्य।

Why did Arjun son kill Arjuna, How did Arjuna and pandav died in the Mahabharata, Know the secret of Mahabharata


अर्जुन की चार पत्नियाँ थी। उनका नाम था द्रोपदी, सुभद्रा, चित्रांगदा और उलूपी। धनुर्धर अर्जुन के 4 बेटे थे। द्रोपदी से "श्रुतकर्मा", सुभद्रा से अभिमन्यु, चित्रांगदा से वभ्रुवाहन, उलूपी से इरावत नाम के अर्जुन के पुत्रों का जन्म हुआ था।

कहा जाता है कि महाभारत में अर्जुन अपने ही पुत्र द्वारा मारे गए थे। यह कैसे हो सकता है? जानने के लिए इस लेख को पूरा पढ़िए। आज हम आपको अर्जुन की मृत्यु का रहस्य बताने वाले हैं।

महाभारत में उल्लेख मिलता है की एक बार श्रीकृष्ण और महर्षि वेदव्यास ने पांडवों को अश्वमेध यज्ञ करने के लिए कहा था। पाण्डवों ने अश्वमेध यज्ञ के लिए शुभ मुहूर्त देख कर यज्ञ शुरू किया। इसके बाद अर्जुन को इस यज्ञ के घोड़े का रक्षक बनाकर घोड़ा खुला छोड़ दिया।

कई दिनों बाद घोड़ा मणिपुर (अभी का मणिपुर राज्य) जा पहुँचा। मणिपुर के राजा "वभ्रुवाहन" को जब इस बात का पता चला की उसके पिता "अर्जुन" उसके राज्य में आए हैं तो वह अपने मंत्रियों और सभाषदों के साथ बहुत सारा धन-सम्पत्ति लेकर अर्जुन से मिलने नगर सीमा तक पहुँच गया।

जब अर्जुन ने यह देखा की मणिपुर का राजा इस प्रकार उनके सामने आया है तो वो अपने बेटे पर कुपित होते हुए बोले की - "बेटा! राजा के रूप में तुम्हारा इस तरह मेरे सामने आना और यह सब करना सही नही है। लगता है तुम क्षत्रिय धर्म को भूल चुके हो। इस समय मैं राजा युधिष्‍ठिर के अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा लेकर तुम्हारे राज्य में आया हूँ। फिर भी तुम मुझसे युद्ध करने की बजाय इस तरह मिलने पहुँच गए।"

महाभारत के प्रसंग में इस बात का उल्लेख है की - उस समय अर्जुन और वभ्रुवाहन के वार्तालाप को अर्जुन की पत्नी उलूपी (नागकन्‍या) भी सुन रही थी। नागकन्‍या उलूपी ने वभ्रुवाहन को बताया कि तुम्हारे पिता अर्जुन गुरुकुल के श्रेष्‍ठ धनुर्धर और वीर हैं। इसलिए तुम इनके साथ युद्ध करो।

युद्ध करने से तुम्हारे पिता "अर्जुन" प्रसन्‍न होंगे। यह जानकर वभ्रुवाहन ने अपने ही पिता "अर्जुन" से एक भीषण युद्ध किया। इस युद्ध में अर्जुन की मृत्यु हो गई थी और वभ्रुवाहन मूर्छित हो गया था।

युद्ध में अर्जुन की मृत्यु की ख़बर सुनते ही अर्जुन की पत्नी "चित्रांगदा" युद्धभूमि में पहुँची और विलाप करने लगी। वह उलूपी को बोली तुम्हारी वजह से वभ्रुवाहन ने अपने पिता से युद्ध किया था। चित्रांगदा ने उलूपी से अपनी पति के प्राणों को वापस करने के लिए बोली।

चित्रांगदा ने उलूपी से कहा कि तुम अर्जुन को जीवित करो नही तो मैं भी अपने प्राण त्याग दूँगी। उसी समय मूर्छित वभ्रुवाहन को होश आया तो वह अपनी माँ को विलाप करते देखा। इसके बाद वभ्रुवाहन ने उलूपी से अपने पिता के प्राणों की रक्षा के लिए निवेदन किया और कहा की अगर उसके पिता "अर्जुन" जीवित नही हुए तो वह भी आमरण अनशन करके अपने प्राण त्याग देगा।

चित्रांगदा और वभ्रुवाहन की व्यथा देखकर कर उलूपी का हृदय भी व्यथित हो गया और उन्होंने संजीवन बूटी मणिका से अर्जुन को जीवित कर दिया।


अर्जुन की मृत्यु कैसे हुई थी ? पांडवों की मृत्यु कैसे हुई थी ? जानिए

युधिष्ठिर को जब पता चला की यदुवंशियों के विनाश का कारण अर्जुन होगा तो उन्हें बहुत दुःख हुआ। इसके बाद युधिष्ठिर और उनके भाई पांडवों ने महर्षि वेदव्यास की बात शिरोधार्य करके अपना राज त्याग दिया और अपने शरीर के साथ स्वर्ग जाने का प्रण किया।

सशरीर स्वर्ग जाने के लिए वो लम्बी यात्रा पर निकले। यात्रा करते करते सभी पांडव हिमालय पहुँच गए। हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों में पांडवों की पत्नी की सबसे पहले मृत्यु हुई, इसके बाद एक एक करके सहदेव, नकुल, अर्जुन और भीम भी मृत्यु के गोद में सो गए। अंत में केवल युधिष्ठिर ही सशरीर के साथ स्वर्ग पहुंचे। इस तरह हुई थी पांडवों कि मृत्यु।

Tags : arjun mahabharat, babruvahana, mahabharat, arjun wife chitrangada, son of arjuna and draupadi,  mahabharat arjun name, ulupi, iravan, son of arjuna and draupadi, arjun in hindi, varchas, how arjun died in hindi, arjun killed whom in mahabharata, who killed kauravas sons, why did arjun die, who killed Arjun

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां