अमित शाह ने दिल्ली को 31 जुलाई तक AAP सरकार के 5.5 लाख कोरोना वायरस के लक्ष्य तक पहुचने से बचाया - Delhi News in Hindi

Delhi News in Hindi - इस वर्ष मार्च के अंत में जब कोरोनो वायरस पूरे भारत में धीरे धीरे फैल रहा था, तो दिल्ली की AAP सरकार ने केंद्र सरकार की योजना "आयुष्मान भारत योजना" में शामिल होने के लिए चुपचाप हस्ताक्षर कर दिए थे। यह एक तथ्य यह है जिसे कभी भी मीडिया ने रिपोर्ट नहीं किया।

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उससे पहले तक केजरीवाल ने हमेशा यही कहा था कि दिल्ली को "आयुष्मान भारत योजना" में शामिल होने की जरुरत नहीं है क्योंकि दिल्ली की अपनी स्वास्थ्य प्रणाली बहुत बेहतर है।

जून 2019 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन को लिखे दो पेज के पत्र में केजरीवाल ने कहा था कि "दिल्ली सरकार की "स्वास्थ्य योजना" आयुष्मान भारत योजना की तुलना में 10 गुना बड़ी और व्यापक है।

और अब ऐसा क्या होगा गया की केजरीवाल ने "आयुष्मान भारत योजना" से बड़ी और बेहतर अपनी योजना को त्याग दिया और केंद्र सरकार की योजना में शामिल होने के लिए चुपचाप हस्ताक्षर कर दिए।

शायद इसका कारण रहा होगा की भारत जब कोरोना वायरस महामारी के जबड़े में फँसता जा रहा था, तभी केजरीवाल और दिल्ली की AAP सरकार को पता लग चुका था की आज तक वो जिस योजना का विरोध कर रहे थे, अब सिर्फ़ वही उनकी सरकार और दिल्ली को बचा सकती है।

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अब हम आपको दिल्ली के मुख्यमंत्री की दुखद कहानी बताते हैं - एक ऐसा मुख्यमंत्री जो हमेशा यही चाहता है कि वो किसी ना किसी वजह से मीडिया की सुर्खियों में बना रहे, इसके लिए चाहे जो करना पड़े, चाहे जिसके ऊपर झूठे आरोप लगाने पड़े, वह ऐसा करने से पीछे नही हटता। मुख्यमंत्री जो शासन करने के अपने वास्तविक कार्य से ऊब चुका है। यही कारण है कि वह हमेशा ऐसे किसी नेता और पार्टी की तलाश में रहता है ताकि वह उसका फ़ायदा उठा सके।

लेकिन कोरोना वायरस ने केजरीवाल और उनकी आप सरकार की सारी होशियारी निकाल दी है। और दिल्ली जैसे बड़े महानगर में, जहाँ सबसे ज़्यादा रिस्क है। AAP सरकार ने हमेशा यही कोशिश कर रही थी कि दिल्ली में किसी भी तरह कोरोना वायरस के आकड़ों को कम करके दिखाना है।

इसके लिए उन्होंने हर तरह का प्रयास किया। जैसे की दिल्ली में कोरोना वायरस परीक्षण बहुत कम किए, इससे हुई मौतों का असली डेटा छिपा दिया, अस्पतालों में बेड की उपलब्धता पर गलत जानकारी दी।

इसके अलावा दिल्ली के अस्पतालों में भीड़ के लिए दूसरे राज्यों के लोगों को दोष देना और इस गैर-मुद्दे पर एक बड़ी सार्वजनिक बहस को चालू करके दिल्ली में कोरोना वायरस के मामलों से ध्यान हटाने की कोशिश करना। उनका यह प्लान "लटकाना, अटकाना, भटकाना" पैमाने पर पूरी तरह खरा उतरता है।


लेकिन दूसरे राज्यों का मुद्दा बनाते हुए, केजरीवाल और AAP सरकार को शर्म नही आई। दिल्ली उनके बाप की बपौती नही है बल्कि देश की राजधानी है। जहाँ देश के हर नागरिक का हक है।

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मुख्यमंत्री को शायद IIT में यही सिखाया गया होगा की अगर ख़ुद कुछ नही कर सकते तो दूसरों के ऊपर दोष लगा दो।

Hindu Alert ने दिल्ली में कोरोना वायरस महामारी का विश्लेषण किया तो जो जानकारी सामने आई वो दिल्ली की AAP सरकार और केजरीवाल के लिए शर्म की बात है। मध्य जून तक, दिल्ली के नगर निगमों से संकलित आंकड़ों से पता चला कि कोरोना वायरस की वजह से हुई मौतों का आंकड़ा दिल्ली राज्य सरकार (AAP सरकार) के आधिकारिक आंकडे से कम से कम दोगुना अधिक है।

13 जून तक दिल्ली में जितने भी कोरोना वायरस टेस्ट किए जा रहे थे उनमे से 37% पॉज़िटिव मिलने लगे थे। राजधानी अब आधिकारिक रूप से नियंत्रण से बाहर हो गई थी।

दिल्ली में न केवल परीक्षण बहुत कम था, इसके अलावा दिल्ली में दूसरी कहानी भी थी। दिल्ली की AAP सरकार सिर्फ़ एक समुदाय जो की AAP का वोट बैंक है उसी का टेस्ट करवा रही थी। यह देश की राजधानी दिल्ली और AAP सरकार के लिए शर्म की बात है।

दिल्ली सरकार द्वारा 14 जून तक किए गए टेस्ट का डेटा क्षेत्र के अनुसार - The Print की रिपोर्ट जिसे आप देख सकते हैं। आप देख सकते हैं अमीरों के इलाक़ों जैसे दक्षिणी दिल्ली और नई दिल्ली क्षेत्र में ज़्यादा परीक्षण किए गए हैं, जबकि शाहदरा जैसी जगहों पर जहाँ शहर के गरीब रहते हैं में कोरोना टेस्ट कम किए जाते थे।


The Print की एक और रिपोर्ट देखें दिल्ली में कोरोना वायरस परीक्षण की सकारात्मकता दर दिल्ली के गरीबों के लिए AAP की क्रूरता की एक और कहानी बताती है।




नई दिल्ली में सकारात्मक की दर 22% है। दक्षिण दिल्ली में यह 28% है। वास्तव में डरावना, लेकिन निश्चित रूप से शाहदरा में आश्चर्यजनक 75% से बेहतर है। लेकिन इसकी दूसरी सच्चाई ये भी थी की दिल्ली के सबसे गरीब हिस्से अधिक पीड़ित थे और AAP सरकार इन गरीब क्षेत्रों में कम से कम संख्या में परीक्षण करवा रही थी।

दिल्ली की AAP सरकार केवल एक धर्म विशेष के लिए काम कर रही है। इस डेटा को देख कर आपका संदेह दूर हो जाएगा। लेकिन वायरस अमीर या गरीब नहीं देखता। जून के मध्य तक AAP सरकार जानती थी कि दिल्ली में स्तिथि अब नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। इसके बाद डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया की 31 जुलाई तक दिल्ली में कोरोना के मामले 5.5 लाख तक पहुँच सकते हैं।

अविश्वसनीय रूप से ऐसे महामारी के समय भी दिल्ली की AAP सरकार, केजरीवाल और सिसोदिया स्थानीय लोगों के लिए अस्पताल के बिस्तरों की संख्या जैसे गैर-मुद्दे पर तमाशा कर रहे थे।

दिल्ली को अपनी चुनी हुई सरकार से जब उम्मीद की कोई किरण नही दिखाई दी उसी समय केंद्र सरकार ने दिल्ली में कोरोना से लड़ने के लिए अमित शाह को मैदान में उतार दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने दिल्ली में अमित शाह को कोरोना कंट्रोल करने के लिए काम करने को कहा।

इसके बाद से अब आप ख़ुद फर्क़ देख सकते हैं। 14 जून 2020 को दिल्ली में कोरोना का डेटा देखें और अब जादू देखें। यहाँ इंडिया टुडे की डेटा इंटेलिजेंस यूनिट द्वारा संकलित डेटा दिया गया है। आप देख सकते हैं कि केंद्र सरकार के कदम रखते ही दिल्ली में परीक्षण की संख्या कितनी तेजी से बढ़ी ?

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आप देख सकते हैं कि अमित शाह के कमान संभालने तक दिल्ली में कितने ज़्यादा पॉज़िटिव केस मिलने लगे थे और उनके कंट्रोल के कुछ समय बाद दिल्ली में पॉज़िटिव केस कितने कम हुए हैं। पैटर्न अप्रमाणित है कि केंद्र सरकार के कंट्रोल के बाद दिल्ली में कोरोना के केस कम हो गए।

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यह कल्पना करना मुश्किल है कि दिल्ली में कितनी बुरी स्तिथि हो सकती थीं ? लेकिन, केजरीवाल को पता था कि अगर दिल्ली में वह स्तिथि को कंट्रोल करने में यदि बुरी तरह से फेल होते हैं तो आरोप लगने के लिए केंद्र सरकार बैठी है। सारा आरोप उसी के ऊपर लगा देंगे और अपना पल्ला झाड़ लेंगे। क्या विचार है, सर जी! केजरीवाल महान हैं। जिसका परिणाम दिल्ली और वहाँ से निवासी भुगत रहे हैं।

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